मण्डल का संक्षिप्त इतिहास

  • 23 सितम्‍बर 1973 : काशी में उत्‍तर प्रदेश उद्योग व्‍यापार प्रतिनिधि मण्‍डल की स्‍थापना। प्रथम अध्‍यक्ष लाला विशम्‍भर दयाल अग्रवाल निर्वाचित हुए ।
  • 10 नवम्‍बर 1974 : दिल्‍ली में व्‍यापारिक रैली आयोजित की जिसके फलस्‍वरूप गेहूं व्‍यापार का राष्‍ट्रीयकरण समाप्‍त हुआ ।
  • 17 जनवरी 1975 : सरकार के बिक्रीकर विभाग द्वारा लगाए गए टर्नओवर टैक्‍स के विरूद्ध उत्‍तर प्रदेश बंद के आह्वाहन पर सम्‍पूर्ण प्रदेश में अभूतपूर्व हड़ताल रही । व्‍यापारियों के प्रबल विरोध के कारण सरकार ने टर्नओवर टैक्‍स वापस ले लिया एवं तमाम सहूलियतें भी दी ।
  • 22 मई 1975 : में व्‍यापार मण्‍डल के बिक्रीकर सर्वे के समय सर्वे की प्रतिलिपि व्‍यापारी को देने का आंदोलन चलाये और इसमें पूर्ण सफलता प्राप्‍त की ।
  • 12 फरवरी 1979 : लखनऊ में अखिल भारतीय व्‍यापारी सम्‍मेलन का आयोजन रवीन्‍द्रालय, चारबाग में श्री जगत बिहारी गुप्‍ता एवं श्री लाला विशम्‍भर दयाल अग्रवाल के प्रयासों से किया गया । जिसका उद्घाटन संसद सदस्‍य एवं व्‍यापारी नेता श्री कुंवर लाल गुप्‍त ने किया । 12 फरवरी 1979 को संपूर्ण लखनऊ बंद रहा ।

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अध्यक्षीय सन्देश

वेदों में व्यापारी को सेठ और साहूकार के नाम से सम्बोधित किया गया है । वैदिक काल से लेकर आज तक व्यापारी ने देश के निर्माता के रूप में कार्य किया।दुर्गम पहाडियों, रेगिस्तान एवं जंगली क्षेत्रों में भी व्यापारी अपनी दुकान के माध्यम से लोगों की सेवा करता रहता है।क्षेत्रीय नागरिकों की हर संकट में मदद करता है । व्यापारी समाज राष्ट्र प्रेमी,ध्रर्म प्रेमी, समाजप्रेमी, परिवारप्रेमी एवं मानवप्रेमी समुदाय है । व्यापारी के रोम रोम में देश और समाज का चिंतन कूट कूट कर भरा है । आजादी के बाद व्यापारी समाज का राजनैतिक दलों ने सम्मान देने के बजाय जगह जगह इनको अपमानित किया, काले कानून बनाए, सर्वे एवं छापों के माध्यम से इनका उत्पीड़न एवं शोषण किया, व्यापारी समाज को इस देश मे सम्मान के साथ साथ उचित स्थान पर स्थापित किया जाये, व्यापार मडंल का यही उद्देश्य है । व्यापार मंडल का कार्य राष्ट्रसेवा का कार्य है । यह विचार पूर्णतः सत्य है कि जिस देश का व्यापारी धनवान होगा वह देश भी धनवान होगा और जिस देश का व्यापारी कंगाल होगा वह देश भी कंगाल होगा ।....

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